एक चर्चित NEET छात्रा मौत और रेप मामले में अदालत ने CBI की धीमी जांच पर कड़ी नाराज़गी जताई है। POCSO कोर्ट ने कहा कि घटना को लगभग 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है और न ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई है। कोर्ट ने एजेंसी को तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
मामला एक NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत और कथित दुष्कर्म से जुड़ा है। परिवार ने शुरुआत से ही मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। बढ़ते दबाव और गंभीर आरोपों को देखते हुए केस CBI को सौंपा गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
POCSO कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि:
- इतने संवेदनशील मामले में जांच में देरी गंभीर चिंता का विषय है।
- पीड़ित परिवार लगातार न्याय का इंतजार कर रहा है।
- CBI को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।
कोर्ट ने जांच एजेंसी को एक निश्चित डेडलाइन देते हुए प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
परिवार को मुआवजा
अदालत ने पीड़िता के परिवार को अंतरिम राहत के तौर पर ₹2.5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि परिवार मानसिक और सामाजिक पीड़ा से गुजर रहा है, इसलिए तत्काल आर्थिक सहायता जरूरी है।
परिवार का आरोप
पीड़िता के परिजनों का कहना है कि:
- मामले में कई अहम पहलुओं की अभी तक गहराई से जांच नहीं हुई।
- कुछ सबूतों को नजरअंदाज किया गया।
- जांच में लगातार देरी से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मामले की अहम बातें
- NEET छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
- रेप और हत्या की आशंका को लेकर मामला दर्ज हुआ।
- जांच बाद में CBI को ट्रांसफर की गई।
- 5 महीने बाद भी जांच अधूरी रहने पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई।
- परिवार को ₹2.5 लाख का मुआवजा देने का आदेश।






